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तीर्थक पत्रिका · ब्रज धाम

माँ कात्यायनी शक्तिपीठ वृन्दावन: दर्शन समय, कथा व पूजा गाइड

वृन्दावन के राधा बाग (रंगजी मंदिर के समीप) स्थित भारत के 51 प्राचीन शक्तिपीठों में से एक "श्री उमा/कात्यायनी शक्तिपीठ" की संपूर्ण यात्रा गाइड: जहाँ माता सती के पवित्र केश-पाश गिरे थे, क्यों ब्रज की गोपियों ने मार्गशीर्ष मास में यहीं कात्यायनी महामंत्र का जप कर श्रीकृष्ण को पति रूप में प्राप्त किया, और दर्शन समय सारिणी।

📅 2026-09-23 ⏱️ 19 मिनट पठन ✍️ गौरव सिंह सोलंकी सत्यापित ब्रज यात्रा गाइड
Katyayani Devi Mandir, Vrindavan — माँ कात्यायनी शक्तिपीठ वृन्दावन: दर्शन समय, कथा व पूजा गाइड
🛕 Katyayani Devi Mandir, Vrindavan

📸 Katyayani Devi Mandir, Vrindavan — Sacred Darshan Gallery

Katyayani Devi Mandir, Vrindavan Vrindavan Braj Dham — Darshan View 2 (Shri Katyayani Peeth Vrindavan: Shakti Peeth Darshan Guide)
Katyayani Devi Mandir, Vrindavan — Sacred Darshan (2)
Katyayani Devi Mandir, Vrindavan Vrindavan Braj Dham — Darshan View 3 (Shri Katyayani Peeth Vrindavan: Shakti Peeth Darshan Guide)
Katyayani Devi Mandir, Vrindavan — Sacred Darshan (3)
Katyayani Devi Mandir, Vrindavan Vrindavan Braj Dham — Darshan View 4 (Shri Katyayani Peeth Vrindavan: Shakti Peeth Darshan Guide)
Katyayani Devi Mandir, Vrindavan — Sacred Darshan (4)
Katyayani Devi Mandir, Vrindavan Vrindavan Braj Dham — Darshan View 5 (Shri Katyayani Peeth Vrindavan: Shakti Peeth Darshan Guide)
Katyayani Devi Mandir, Vrindavan — Sacred Darshan (5)
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🛕 मंदिर दर्शन व आरती त्वरित सारांश
मुख्य आराध्य देवमाँ कात्यायनी / उमा देवी (ब्रज की योगमाया आदिशक्ति) एवं भैरव भूतेश्वर महादेव + लक्ष्मी-नारायण
स्थानराधा बाग, श्री रंगजी मंदिर के दक्षिणी द्वार के समीप, परिक्रमा मार्ग, वृन्दावन, उत्तर प्रदेश 281121
दर्शन व आरती समयग्रीष्मकाल: प्रातः 05:30 – 12:00 PM एवं सायं 04:00 – 09:00 PM | शीतकाल: प्रातः 06:00 – 12:00 PM एवं सायं 04:00 – 08:30 PM
यात्रा का श्रेष्ठ समयमार्गशीर्ष मास (अगहन), चैत्र/शारदीय नवरात्रि अथवा किसी भी शुक्रवार प्रातः 07:00 से 10:00 बजे
विशेष आरतीमनोवांछित वर एवं शीघ्र विवाह हेतु कात्यायनी महामंत्र संकल्प पूजा, षोडशोपचार अर्चना एवं नवरात्रि शतचंडी महायज्ञ
यात्री नियम व परामर्शमाता को लाल चुनरी, गुड़हल के पुष्प व सिंदूर अर्पित करें; संगमरमर मंडप में बैठकर भागवत-वर्णित कात्यायनी मंत्र का 108 बार जप करें।

माँ कात्यायनी शक्तिपीठ वृन्दावन: दर्शन समय, कथा व पूजा गाइड

वृन्दावन के राधा बाग (रंगजी मंदिर के समीप) स्थित भारत के 51 प्राचीन शक्तिपीठों में से एक "श्री उमा/कात्यायनी शक्तिपीठ" की संपूर्ण यात्रा गाइड: जहाँ माता सती के पवित्र केश-पाश गिरे थे, क्यों ब्रज की गोपियों ने मार्गशीर्ष मास में यहीं कात्यायनी महामंत्र का जप कर श्रीकृष्ण को पति रूप में प्राप्त किया, और दर्शन समय सारिणी।

1. जहाँ शक्ति और भक्ति का मिलन होता है: वृन्दावन में स्थित भारत का 51वाँ महा-शक्तिपीठ

वृन्दावन धाम आने वाले अधिकांश यात्री इसे केवल श्री राधा-माधव की लीला-भूमि के रूप में जानते हैं, किंतु बहुत कम श्रद्धालुओं को यह ज्ञात है कि श्री रंगनाथ मंदिर (रंगजी मंदिर) के दक्षिणी द्वार से मात्र तीन सौ मीटर की दूरी पर शांत 'राधा बाग' के वृक्षों के मध्य सनातन धर्म के 51 महा-शक्तिपीठों में से एक अत्यंत सिद्ध शक्तिपीठ विराजमान है—'श्री कात्यायनी शक्तिपीठ' (जिसे तंत्र ग्रंथों में 'उमा शक्तिपीठ' कहा गया है)। तंत्र चूड़ामणि और पीठ-निर्णय के प्रसिद्ध श्लोक ("वृन्दावने केशजालं उमा नाम तु देवता, भूतेशो भैरवस्तत्र") के अनुसार जब दक्ष-यज्ञ के पश्चात भगवान शिव के कंधों से माता सती के पार्थिव अंग पृथ्वी पर गिरे, तब वृन्दावन के इस पावन वन में माता सती के सुगंधित 'केश-पाश' (बालों का समूह) गिरे थे, और उनकी रक्षा के लिए स्वयं भगवान शंकर मथुरा में भैरव 'श्री भूतेश्वर महादेव' के रूप में प्रतिष्ठित हुए।

इस शक्तिपीठ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ शाक्त और वैष्णव दोनों परंपराओं का अद्भुत संगम होता है। श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध के बाईसवें अध्याय में वर्णन आता है कि द्वापर युग में हेमंत ऋतु के प्रथम मास (मार्गशीर्ष/अगहन) में ब्रज की कुमारिका गोपियों ने पूरे एक महीने तक प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में यमुना स्नान कर इसी तट पर माँ कात्यायनी की बालू (रेत) की प्रतिमा बनाई थी। उन्होंने चंदन, धूप, दीप और हविष्य-अन्न का भोग लगाकर एक ही प्रार्थना की थी—"कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि, नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः" (हे महायोगिनी माँ कात्यायनी! नंदगोप के पुत्र श्रीकृष्ण को ही हमारा पति बनाइए)। माता कात्यायनी की कृपा से ही गोपियों को चीर-हरण और महारास में भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति हुई, जिसके कारण आज भी यह पीठ शीघ्र विवाह और कृष्ण-भक्ति दोनों का सर्वोच्च वरदान-स्थल माना जाता है।

तीर्थक (Teerthak) आध्यात्मिक गाइड के माध्यम से माँ कात्यायनी शक्तिपीठ वृन्दावन (राधा बाग) संपूर्ण गाइड की यात्रा करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए यह आवश्यक है कि वह इस पावन तीर्थ के शास्त्रीय इतिहास, पौराणिक प्रमाण और ब्रज की जीवंत सेवा-परंपरा को समझते हुए दर्शन करे। यहाँ का प्रत्येक आँगन, सोपान और वृक्ष महान सिद्ध संतों की अखंड साधना से अभिमंत्रित है।

ब्रज के प्राचीन रसिक एवं वैष्णव ग्रंथों—जैसे श्री हित चौरासी, श्री केलिमाल, भक्तिरसामृतसिंधु, षट्-संदर्भ और स्कंद पुराण के मथुरा माहात्म्य—में इस पावन तीर्थ की प्रत्येक सीढ़ी, झरोखे, वट-वृक्ष और सरोवर को जड़ पाषाण न मानकर साक्षात् चिन्मय (सच्चिदानंदमय) स्वरूप वर्णित किया गया है। संसार के अन्य ऐतिहासिक स्मारक समय के साथ केवल संग्रहालय बनकर रह जाते हैं, किंतु वृन्दावन, बलदेव और यमुना तट की यह पावन भूमि आज भी प्रातः 04:30 बजे की मंगला आरती से लेकर रात्रि शयन पर्यंत चलने वाली अखंड अष्टयाम सेवा से जीवंत रहती है। जब कोई श्रद्धालु यहाँ चंदन-केसर की सुगंध, पखावज और मंजीरों के साथ गूँजते समाज-गायन तथा तुलसी की माला फेरते ब्रजवासी संतों के दर्शन करता है, तो उसका हृदय स्वतः ही सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर अलौकिक आनंद में डूब जाता है।

💡 यात्री परामर्श: Unmarried devotees seeking auspicious matrimony blessings can participate in special Katyayani archana puja in the temple sanctum during morning hours.

2. तंत्र चूड़ामणि का प्रमाण: राधा बाग में माता सती के पवित्र "केश-पाश" (बालों) का निपात

इस पावन धाम की दैनिक पूजा और सेवा-पद्धति सैकड़ों वर्षों से चली आ रही वंशानुगत आचार्य एवं गोस्वामी परंपरा के अनुसार अत्यंत निष्ठापूर्वक संपन्न होती है। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में आम भक्तों के लिए पट खुलने से पूर्व ही पुजारीगण पंचामृत स्नान, सुगंधित चंदन-केसर लेपन और ऋतु के अनुकूल ताजे पुष्पों से श्री विग्रह का नयनाभिराम शृंगार करते हैं।

क्योंकि वृन्दावन, बलदेव और यमुना तटीय आश्रमों में ग्रीष्मकालीन सेवा (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आश्विन पूर्णिमा) और शीतकालीन सेवा (कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा) के अनुसार दर्शन समय में 30 से 45 मिनट का अंतर आता है, इसलिए प्रस्थान से पूर्व 'तीर्थक ब्रज वैष्णव पंचांग' पर सूर्योदय एवं आरती का समय अवश्य देख लें।

ब्रज के प्राचीन रसिक ग्रंथों—जैसे श्री हित चौरासी, श्री केलिमाल, भक्तिरसामृतसिंधु और स्कंद पुराण के मथुरा माहात्म्य—में इस पावन तीर्थ की प्रत्येक सीढ़ी, झरोखे, वट-वृक्ष और सरोवर को जड़ पाषाण न मानकर साक्षात् चिन्मय (सच्चिदानंदमय) स्वरूप वर्णित किया गया है। संसार के अन्य ऐतिहासिक स्मारक समय के साथ केवल संग्रहालय बनकर रह जाते हैं, किंतु ब्रज की यह पावन भूमि आज भी प्रातः 04:30 बजे की मंगला आरती से लेकर रात्रि शयन पर्यंत चलने वाली अखंड अष्टयाम सेवा से जीवंत रहती है।

3. श्रीमद्भागवत दशम स्कंध: जब गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने हेतु किया मार्गशीर्ष कात्यायनी व्रत

इस मंदिर एवं तपोभूमि की वास्तुकला और परिक्रमा मार्ग में गहरा आध्यात्मिक विज्ञान निहित है। चाहे आप राधा दामोदर मंदिर में गिरिराज शिला की चार परिक्रमा कर रहे हों, पागल बाबा मंदिर की नौ संगमरमर मंजिलों पर चढ़ रहे हों, माँ कात्यायनी पीठ के शांत मंडप में मंत्र-जप कर रहे हों, बलदेव में आठ फीट ऊँचे दाऊजी महाराज को निहार रहे हों अथवा यमुना पार देवराहा बाबा के काष्ठ-मचान के नीचे खड़े हों—यहाँ का वातावरण मन के समस्त विक्षेपों को तुरंत शांत कर देता है।

वरिष्ठ नागरिकों (65 वर्ष से अधिक) और छोटे बच्चों के साथ आने वाले परिवारों के लिए प्रातः 06:30 से 09:30 बजे का समय दर्शन के लिए सर्वोत्तम रहता है, जब संगमरमर का फर्श शीतल रहता है और बिना किसी भीड़ के गर्भगृह के समीप खड़े होकर दर्शन सुलभ होते हैं।

मंदिर मर्यादा का सदैव पालन करें: मुख्य गर्भगृह के भीतर फ्लैश फोटोग्राफी या रील बनाने से बचें, अपने मोबाइल फोन को शांत (Silent) रखें और दोनों हाथ जोड़कर श्री विग्रह के चरण-कमलों से लेकर मुस्कुराते हुए मुखारविंद तक को अपने हृदय में बसाएँ।

💡 यात्री परामर्श: मार्गशीर्ष मास (अगहन), चैत्र/शारदीय नवरात्रि अथवा किसी भी शुक्रवार प्रातः 07:00 से 10:00 बजे — माता को लाल चुनरी, गुड़हल के पुष्प व सिंदूर अर्पित करें; संगमरमर मंडप में बैठकर भागवत-वर्णित कात्यायनी मंत्र का 108 बार जप करें।

4. शीघ्र विवाह एवं कृष्ण-प्रेम हेतु अमोघ "कात्यायनी महामंत्र": शुद्ध उच्चारण, अर्थ एवं जप विधि

मुख्य देवालय के साथ-साथ इसके परिसर में स्थित पवित्र सरोवर (जैसे बलदेव का क्षीर सागर, राधा दामोदर की समाधि वाटिका, या यमुना घाट) और प्राचीन गौशालाओं का दर्शन करने से ही यात्रा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। ब्रज चौरासी कोस की परंपरा में प्रत्येक मुख्य मंदिर अपने निकटवर्ती कुंड और भजन कुटीर से जुड़ा हुआ है।

दर्शन के उपरांत मंदिर के चौक या कुंड की सीढ़ियों पर दस मिनट शांत बैठकर हरे कृष्ण महामंत्र, कात्यायनी महामंत्र अथवा देवराहा बाबा के सिद्ध मंत्र ("कृष्णाय वासुदेवाय...") की एक माला (108 मनके) का जप अवश्य करें।

जो भक्त अपनी यात्रा में दर्शन किए गए श्री विग्रहों, संत समाधियों और कुंडों का विवरण अपनी डायरी या 'तीर्थक ऐप' में सुरक्षित रखते हैं, उन्हें घर लौटने के पश्चात भी अपने दैनिक ध्यान और नाम-जप में ब्रज-वास का सजीव अनुभव होता रहता है।

ब्रज के प्राचीन रसिक एवं वैष्णव ग्रंथों—जैसे श्री हित चौरासी, श्री केलिमाल, भक्तिरसामृतसिंधु, षट्-संदर्भ और स्कंद पुराण के मथुरा माहात्म्य—में इस पावन तीर्थ की प्रत्येक सीढ़ी, झरोखे, वट-वृक्ष और सरोवर को जड़ पाषाण न मानकर साक्षात् चिन्मय (सच्चिदानंदमय) स्वरूप वर्णित किया गया है। संसार के अन्य ऐतिहासिक स्मारक समय के साथ केवल संग्रहालय बनकर रह जाते हैं, किंतु वृन्दावन, बलदेव और यमुना तट की यह पावन भूमि आज भी प्रातः 04:30 बजे की मंगला आरती से लेकर रात्रि शयन पर्यंत चलने वाली अखंड अष्टयाम सेवा से जीवंत रहती है। जब कोई श्रद्धालु यहाँ चंदन-केसर की सुगंध, पखावज और मंजीरों के साथ गूँजते समाज-गायन तथा तुलसी की माला फेरते ब्रजवासी संतों के दर्शन करता है, तो उसका हृदय स्वतः ही सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर अलौकिक आनंद में डूब जाता है।

5. स्वामी केशवानंद जी महाराज द्वारा सन् 1923 में पुनर्निर्माण एवं मंदिर के पाँच दिव्य गर्भगृह

वर्ष के बारह महीनों में यहाँ ऋतुओं के अनुसार भव्य उत्सव मनाए जाते हैं—ग्रीष्म ऋतु में सुगंधित 'फूल बंगला' और 'चंदन यात्रा', श्रावण में 'झूलन हिंडोला', भाद्रपद में 'श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व बलदेव छठ', आश्विन-चैत्र में 'नवरात्रि महायज्ञ', कार्तिक में 'दामोदर दीपदान', मार्गशीर्ष में 'कात्यायनी व्रत व प्राकट्य उत्सव' और फाल्गुन-चैत्र में 'ब्रज की होली व दाऊजी का हुरंगा'।

जब कोई श्रद्धालु यहाँ चंदन-केसर की सुगंध, पखावज और मंजीरों के साथ गूँजते समाज-गायन तथा तुलसी की माला फेरते ब्रजवासी संतों के दर्शन करता है, तो उसका हृदय स्वतः ही सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर अलौकिक आनंद में डूब जाता है।

प्रस्थान से पूर्व मंदिर के अधिकृत पटल से तुलसी-मिश्रित चरणामृत एवं महाप्रसाद अवश्य ग्रहण करें, तथा आश्रम की गौशाला में गायों को हरा चारा व गुड़ समर्पित करें।

6. नवरात्रि महोत्सव, मार्गशीर्ष मास उपासना एवं मथुरा के भैरव श्री भूतेश्वर महादेव से संबंध

धाम-निष्ठा और ब्रज की स्वच्छता प्रत्येक यात्री का पावन कर्तव्य है। मंदिर की रसोई में शुद्ध देसी गाय के घी से निर्मित महाप्रसाद—चाहे वह माखन-मिश्री हो, मथुरा का पेड़ा हो, रबड़ी हो या खिचड़ी—को आदरपूर्वक ग्रहण करने के पश्चात पत्तल और दोने केवल निर्धारित कूड़ेदान में ही डालें।

वृन्दावन की गलियों में बंदरों से अपने चश्मे, मोबाइल फोन और पर्स की सुरक्षा हेतु उन्हें वाहन से उतरते समय ही बैग के भीतर रख लें। ब्रज के समस्त जीवों, गायों, मयूरों और प्राचीन वृक्षों को भगवान के पार्षद मानकर उनका सम्मान करें।

यात्रा के प्रारंभ और समापन पर पावन 'ब्रजरज' को प्रणाम कर अपने मस्तक पर अवश्य धारण करें।

💡 यात्री परामर्श: मार्गशीर्ष मास (अगहन), चैत्र/शारदीय नवरात्रि अथवा किसी भी शुक्रवार प्रातः 07:00 से 10:00 बजे — माता को लाल चुनरी, गुड़हल के पुष्प व सिंदूर अर्पित करें; संगमरमर मंडप में बैठकर भागवत-वर्णित कात्यायनी मंत्र का 108 बार जप करें।

7. दर्शन समय सारिणी, पूजा सामग्री एवं रंगजी मंदिर से पैदल पहुँचने का सुगम मार्ग

समय और ऊर्जा की बचत के लिए अपनी यात्रा को भौगोलिक क्रम में नियोजित करें। वृन्दावन नगर के भीतर स्थित तीर्थों—श्री राधा दामोदर मंदिर, पागल बाबा मंदिर, कात्यायनी शक्तिपीठ और केशी घाट के सामने यमुना पार देवराहा बाबा आश्रम—का दर्शन आप ई-रिक्शा और 5 मिनट की नौका यात्रा द्वारा एक ही दिन में सुगमता से कर सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर, यमुना के पूर्वी तट पर स्थित गोकुल, रमण रेती, ब्रह्मांड घाट, महावन (चौरासी खंभा) और बलदेव स्थित 'श्री दाऊजी महाराज मंदिर' की यात्रा गोकुल बैराज मार्ग से प्रातः 4 घंटे में अत्यंत आनंदपूर्वक संपन्न हो जाती है।

अपने फोन में 'तीर्थक (Teerthak) ऐप' अवश्य रखें, जिससे आपको लाइव आरती काउंटडाउन, ऑफलाइन परिक्रमा मैप और आज का वृन्दावन वैष्णव पंचांग तुरंत उपलब्ध रहे—जय जय श्री राधे श्याम! दाऊजी महाराज की जय!

🇮🇳 हिंदी और Hinglish यात्री खोज सहायता (Hindi & Hinglish Pilgrim Guide)

माँ कात्यायनी शक्तिपीठ वृन्दावन: दर्शन समय, कथा व पूजा गाइड — यदि आप वृन्दावन, मथुरा, गोवर्धन या बरसाना यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो तीर्थक (Teerthak App) पर मंदिर खुलने और बंद होने का लाइव समय, मंगला और श्रृंगार आरती टाइमिंग, परिक्रमा जीपीएस मैप और एकादशी पंचांग हिंदी तथा अंग्रेजी में उपलब्ध हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: माता सती का कौन-सा अंग गिरने से वृन्दावन का कात्यायनी मंदिर भारत के 51 महा-शक्तिपीठों में गिना जाता है?

तंत्र चूड़ामणि और पीठ-निर्णय के श्लोक ("वृन्दावने केशजालं उमा नाम तु देवता, भूतेशो भैरवस्तत्र") के अनुसार जब भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से माता सती के देह-खंड पृथ्वी पर गिरे, तब वृन्दावन के इस राधा बाग क्षेत्र में माता के पवित्र "केश-पाश" (बालों का जूड़ा) गिरे थे। यहाँ शक्ति का नाम "उमा/कात्यायनी" और भैरव का नाम "श्री भूतेश्वर महादेव" है।

प्रश्न 2: श्रीमद्भागवत के अनुसार ब्रज की कुमारिका गोपियों ने मार्गशीर्ष मास में माँ कात्यायनी की पूजा क्यों की थी?

श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध (अध्याय 22) के अनुसार हेमंत ऋतु के प्रथम मास (मार्गशीर्ष/अगहन) में ब्रज की कुँवारी गोपियों ने एक महीने तक प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व यमुना स्नान कर बालू से माँ कात्यायनी की प्रतिमा बनाई और "कात्यायनि महामाये..." मंत्र का जप करते हुए नंदनंदन श्रीकृष्ण को ही पति रूप में पाने का वरदान माँगा, जिसे माता ने पूर्ण किया।

प्रश्न 3: अविवाहित कन्याएँ और माता-पिता शीघ्र एवं सुयोग्य विवाह की कामना से वृन्दावन के कात्यायनी पीठ क्यों आते हैं?

क्योंकि माँ कात्यायनी ने स्वयं गोपियों के व्रत से प्रसन्न होकर उन्हें साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण से मिलाया था, इसलिए वैदिक ज्योतिष और धर्मशास्त्रों में विवाह में आ रही बाधा, मंगल दोष या विलंब को दूर कर सुयोग्य जीवनसाथी प्राप्त करने के लिए वृन्दावन के इस सिद्ध कात्यायनी पीठ में संकल्प और मंत्र-जप को अमोघ माना गया है।

प्रश्न 4: सदियों तक वन में गुप्त रहे इस प्राचीन शक्तिपीठ पर सन् 1923 में भव्य संगमरमर मंदिर का पुनर्निर्माण किसने कराया?

मध्यकाल में आक्रांतों के कारण जब यह स्थान यमुना के सघन वनों में लुप्त हो गया था, तब हिमालय के महान सिद्ध योगी स्वामी केशवानंद ब्रह्मचारी जी महाराज ने माँ कात्यायनी के प्रत्यक्ष स्वप्न-आदेश से राधा बाग में इस मूल पीठ को पुनः खोजा और 1 फरवरी 1923 (माघ पूर्णिमा) को वर्तमान भव्य श्वेत संगमरमर मंदिर की प्रतिष्ठा की।

प्रश्न 5: ब्रज के वैष्णव दर्शन में माँ कात्यायनी (योगमाया) का भगवान श्रीकृष्ण से क्या संबंध है?

ब्रज के वैष्णव सिद्धांत में माँ कात्यायनी कोई बाह्य देवी नहीं, अपितु स्वयं भगवान की अंतरंगा "योगमाया" एवं "पौर्णमासी देवी" हैं, जिन्होंने जन्माष्टमी की रात्रि को यशोदा मैया के गर्भ से जन्म लेकर कंस को चेतावनी दी थी और जो नित्य प्रिया-प्रियतम की मिलन-लीलाओं का संचालन करती हैं।

तीर्थक (Teerthak) के साथ करें दिव्य ब्रज यात्रा

कभी भी दर्शन या आरती न छूटने दें। मंदिर खुलने-बंद होने का लाइव काउंटडाउन, भीड़ हीटमैप, ऑफलाइन 21 किमी गोवर्धन परिक्रमा जीपीएस, और प्रामाणिक वैदिक पंचांग हिंदी में।

स्रोत एवं संपादकीय टिप्पणी

यह लेख गौरव सिंह सोलंकी (संस्थापक व आध्यात्मिक शोधकर्ता) द्वारा शोधित है। मंदिर समय व सेवा नियमों में परिवर्तन संभव है; यात्रा से पूर्व मंदिर ट्रस्ट से पुष्टि करें।

  1. जिला प्रशासन मथुरा (https://mathura.nic.in)
  2. श्री बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट (https://bihariji.org)
  3. प्रेम मंदिर आधिकारिक समय (https://premmandir.org.in)
  4. इस्कॉन वृन्दावन मीडिया सेल (https://iskconvrindavan.com)
संपादकीय मानक: यह लेख किसी भी अपुष्ट दावे या शुल्क को प्रकाशित नहीं करता। तीर्थयात्रियों के लिए पूर्णतः सत्यापित जानकारी।